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  • 40000 ई.पू. – नानौन, चंदेरी के दूरदराज के इलाकों के एक गांव में, पूर्व ऐतिहासिक रॉक चित्रों का पाया जाना।
  • 6 शताब्दी ई. – 10 शताब्दी ई. – गुप्त काल के दौरान बेहती गाँव में, जो कि चंदेरी से 20 किलोमीटर दक्षिण पूर्व स्थित है, एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग पर एक हिंदू मंदिर का पाया जाना जो कि गुप्त साम्राज्य के दौरान शायद एक रास्ता था।

  • 8 – 10 वीं शताब्दी ई. – गुर्जर – प्रतिहार राज बूढ़ी चंदेरी (पुरानी) में शुरू।
  • 11 वीं शताब्दी ई. – किरतीपाल ने बूढ़ी चंदेरी से वर्तमान चंदेरी शहर में राजधानी बसाया, जिसकी खासियत रही – शानदार कीर्ति दुर्ग किला।
  • 11 वीं शताब्दी ई. के अंतिम साल – गुर्जर – प्रतिहार राज का पतन, चंदेरी पर कच्छवों का कब्जा।
  • 13 वीं शताब्दी ई. – शमशुद्दीन अलतमस, दिल्ली सल्तनत के प्रमुख और घियासुद्दीन बलबन उनके प्रधानमंत्री ने सन् 1251 ई. में चंदेरी पर हमला किया और कच्छव राजा चाहद देवा को हराने के साथ चंदेरी को दिल्ली सल्तनत में शामिल कर लिया।
  • 14 वीं सदी ई. – दिलावर खान गोरी, चंदेरी के राज्यपाल ने दिल्ली सल्तनत से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की। उन्होंने सन् 1392 ई. में मालवा सल्तनत की स्थापना की और सन् 1401 ई. में इस क्षेत्र पर प्रभावी नियंत्रण कर लिया। मालवा राज 16 ​​वीं सदी ई. की शुरुआत तक उनके उत्तराधिकारियों के शासन में जारी रही।
  • 16 वीं सदी ई. की शुरूआत – राणा सांगा, चित्तौड़ का राजा ने चंदेरीपर कब्जा कर लिया और चंदेरी के शासक के रूप में अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगी मेदिनी राय को बिठाया।
  • सन्1528 ई. – सम्राट बाबर, मुगल साम्राज्य के प्रमुख ने चंदेरी किले पर कब्जा किया और चंदेरी पर मुग़लों का नियंत्रण स्थापित किया। हमले से पहले मेदिनी राय और उनके सैनिकों ने सामुहिक आत्महत्या कर ली और महिलाओं ने जौहर स्वीकार कर लिया।
  • सन् 1605 ई. – जहांगीर ने मुगल साम्राज्य की ओर से चंदेरी क्षेत्र का शासन राम शाह बुंदेला के हाथ में सौंप दिया। यह बुंदेला वंश की शुरूआत थी जो सन् 1811 ई. तक जारी रही।
  • सन् 1811 ई. – कैप्टन जॉन बैप्टिस्ट फिलोस और उनकी सेना ने चंदेरी को दौलत राव सिंधिया के लिए जीता और चंदेरी सिंधिया राज में शामिल हो गया।
  • सन् 1844 ई. – कुंवर मर्दन सिंह, चंदेरी के अंतिम बुंदेला राजा ने चंदेरी को सिंधिया के अधिकार से छीन कर वहाँ बुंदेला शासन को पुनर्स्थापित किया।
  • सन् 1857 ई. – कुंवर मर्दन सिंह झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिल गया और सन्1857 ई. के विद्रोह में हिस्सा लिया था।
  • सन् 1858 ई. – सर ह्यूग रोज के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने चंदेरी किले पर कब्जा किया और उसे सिंधिया को लौटा दिया, जिससे कि दो सौ पचास साल के बुंदेला शासन के अंत हो गया।
  • सन् 1947 ई. – ग्वालियर का राज, जिसमें चंदेरी भी शामिल था को नवगठित राज्य मध्य भारत में शामिल कर लिया गया जिसका बाद में पुनर्गठन हुआ और उसका नाम मध्य प्रदेश रखा गया।

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