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Purana Madarsa,Chanderi

मालवा सल्तनत के महमूद खिलजी के संरक्षण में सन् 1450 ई. में निर्मित, यह सुन्दर संरचना वास्तव में एक मदारीस (शिक्षक) और दारूल उलूम (विश्वविद्यालय) के आलिम (कुलपति) की कब्र है जो इस अवधि के दौरान सेवा में था और जिसके खंडहर अब आसपास के क्षेत्र में देखे जा सकते है। मदरसा एक भ्रामक नाम है, यह शायद इस स्मारक के आसपास के क्षेत्र में एक मदरसे की उपस्थिति के कारण इसके साथ कालांतर में जुड़ गया।

इस स्मारक के दीवार पर बारीक नक्काशी है जिसमें छह कोणों वाला, स्टार ऑफ डेविड के अनुरूप, सजावटी सितारा अन्य सजावटी रूपांकनों के साथ- साथ प्रबल अभिव्यक्ति पाता है। अर्ध-चंद्राकार राउण्डेल खूबसूरती से खुदी हुई फूलों के साथ आंतरिक और बाहरी दीवारों के ऊपरी भागों में सजे हैं। वर्गाकार केंद्रीय कक्ष एक मेहराबदार गलियारे से घिरा हुआ है। इस चैम्बर में सामने की दीवार के बीच एक धनुषाकार द्वार के माध्यम से पहुँचा जा सकता है। इस कक्ष के भीतर दो कब्र के पत्थर हैं जो कि एक दूसरे के बगल में रखे है जिनपर कि उत्तम ज्यामितीय पैटर्न के साथ नक्काशी उत्कीर्ण हैं। इसके अलावा, पश्चिमी दीवार के इंटीरियर पर, बीचोबीच का भाग सुशोभनता लिए प्रार्थना की दिशा का संकेत देकर खुदा हुआ ह।.

यह पांच गुंबद वाला संरचना पूरी तरह से बलुआ पत्थर से बनाया हुआ है जिसमें से सबसे बड़ा केंद्र में खड़ा था जो कि चार छोटी-छोटी गुंबद से घिरा हुआ है।

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