Chanderi.org

About Chanderi

चंदेरी शहर हिंदुओं, मुसलमानों और आदिवासियों का घर है, प्रत्येक की संस्कृति दूसरे से अलग लेकिन कुछ मामलों में समान भी है। उनकी आपसी मेलजोल से एक समग्र सांप्रदायिक सौहार्द सम्पन्न संस्कृति का निर्माण हुआ है।

18 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले, चंदेरी शहर मोटे तौर पर दो भागों में विभाजित है – अंदर शहर और बाहर शहर, प्रत्येक में प्राचीन काल की सुन्दर कृतियों जैसे महलों, मस्जिदों, मंदिरों, और हवेलियाँ विद्यमान हैं। अंदर शहर चंदेरी के सात दुर्ग की दीवारों में से एक के भीतर बसा था। यह सबसे पुराना बसा हुआ क्षेत्र है और शहर का पवित्रतम स्थल है क्योंकि इसमें शानदार जगेश्वरी मंदिर और चौबीसी जैन मंदिर सहित शहर के अधिकांश मंदिर हैं।

शहर के व्यापारी, जैन और महेश्वरी लोग, अपनी दुकानों में विराजमान, भावी खरीदारों के साथ बातचीत करते देखे जा सकते हैं। अंदर शहर की विशाल हवेलियाँ जिनमें से कुछ 600 से भी अधिक साल पुराने हैं, उनके विशिष्ट शैली और बुलाते प्रतीत होते झरोखों के साथ सबको बुलाते हैं। तीन – तल्लों वाला बाजार जो कि खिलजी सुल्तानों की एक नवीनता थी, डिजाइन और अवधारणा दोनों में आकर्षक है। मध्ययुगीन समय में, नीचे का तल्ला साधारण लोगों के लिये, बीच का तल्ला रईसों और घोड़ों पर आने वाले व्यापारियों के लिए और ऊपरी तल्ला हाथियों पर आने वाले शाही लोगों के लिए बना था।

मैदान गली, अंदर शहर का एक प्रमुख कॉलोनी, में शेख, मुगल, साइद और पठान की तरह ऊपरी वर्ग के मुसलमान रहते है। हलाँकि उनमें से ज्यादातर जमीन के मालिक हैं, लेकिन उनमें से कुछ सफेद कॉलरधारी अधिकारियों के रैंक में शामिल हो गए हैं। मैदान गली की परिधि जिसमें साधारण घर हैं, में सब्जफरोश और धोबी बसे है। सब्जफरोश अपने सब्जी की गाड़ियां के साथ सड़कों पर देखे जा सकते है, जबकि धोबी धोने, सुखाने और कपड़े इस्त्री करने के अपने दैनिक कामकाज में तल्लीन रहते हैं। मंदिर की घंटी, अज़ान की प्रतिध्वनित होती आवाज, खेलते बच्चे, बात करते बुजुर्ग, बकरी की मिमियाहट, सभी कोलाहल के साथ करघों की लयबद्ध प्रतिध्वनि, अंदर शहर की सड़कों की विशेषताएँ हैं।

कोली, अंसारी, राजपूत, बनिया, बसोर, खटिक, धिमार, अहीर, घोसी और आदिवासियों का निवास स्थान बाहर शहर, वास्तव में चंदेरी की जनसंख्या की मिली जुले चरित्र का प्रतिनिधि है। बस्तियों, जो दिखने में मामूली हैं, करघों की ध्वनि के साथ जीवित हो उठती हैं जिसमें कभी कभी एक बकरी की आवाज आ जाती है। बुनकरी कोली और अंसारियों के लिए एक जुनून है और आजीविका का एकमात्र साधन है। यह एक कौशल है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित होता है, और इससे परिवार बंधे रहते हैं उसी तरह कि जैसे कपड़े बुने जाते है।

कोली बीड़ी बनाने में भी लगे हुए हैं, जो एक अन्य कौशल है जो युवा पीढ़ी को सिखाया जाता है। घर के बच्चे वरण्डा और आंगनों में तन्मयता से बीड़ियों को मोड़नें में लगे देखे जा सकते है जबकि उनके माता-पिता करघे पर लगातार परिश्रम करते रहते हैं। बनिया लोग शहर के बाजारों में उनके जन्नत यानी अपनी किराने की दुकानों के मामलों में व्यस्त देखे जा सकते है। बासोर जाति के लोग आंगनों में बैठे उनकी परंपरागत बांस, टोकरी, बक्से, पंखे और विभिन्न प्रकार की चलनी बनाते रहते हैं। बकरी और मुर्गियाँ, ज्यादातर हिंदू कसाईयों के, खटिक जो अपने परिवार के साथ चारों ओर आराम से घूमते रहते हैं, संकरी गलियों की हलचल को बढ़ाते हैं। अहीर और घोसी अपनी गायों और भैंसों के साथ लड़ते झगड़ते और उन्हें गाँव के सुन्दर हरे घास के मैदानों में ले जाते देखे जा सकते है। धीमार शहर के कई झीलों और तालाबों के पास झुंड के झुंड, जाल फेंकते और बाद में बाजार में मछली के साथ जाते देखे जा सकते हैं।

ज्यादातर गोंड जनजाति से संबंधित आदिवासी शहर के बाहरी इलाकों में फूस की झोपड़ियों में रहते हैं। एक आदिवासी के जीवन का एक साधारण दिन सुबह जल्दी शुरू होता है जब वह अपने परिवार के साथ जंगल में गोंद, लकड़ी, शहद, और जड़ी-बूटी एकत्र करने के लिए निकलता है। इन सामानों को शाम को बाजार में ले जाया और बेचा जाता है। आदिवासी फिर अपने परिवार के लिए कमाये गये पैसे से सब्जियाँ और अनाज खरीदता है। यह उसके जीवन का चक्र है, जंगल से बाजार और फिर घर।

बंजारे जून से अक्टूबर महीने के बीच बाहर शहर की सड़कों पर रहते हैं। उनकी अस्थायी बस्तियाँ, जो ज्यादातर बांस के खंभे पर टिकाये काले प्लास्टिक या तिरपाल शीट के बने होते है, वे ऊबड़-खाबड़ और कच्चे लगते है, लेकिन उनमें एक आकर्षण भी होता है। ये उनके जीने का तरीका है कि वे अपने सामान के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक भटकते रहते हैं, वे बसते हैं और अपना जीविकोपार्जन ज्यादातर लोहार के रूप में बर्तन, धूपदान, चाकू, खेती के उपकरण और अन्य उपयोगी वस्तु बनाकर करते हैं।

चंदेरी में बोली जाने वाली भाषाओं में विविधता हैं, मुस्लिम परिवारों में हिंदी और उर्दू का एक मिश्रण बोलते हैं, जबकि हिंदु बुंदेली में बातचीत करना पसंद करते हैं। अंग्रेजी का थोड़ा बहुत उपयोग, विशेष रूप से युवा पीढ़ी के बीच आम है। चंदेरी में परिधानः पारंपरिक है जैसा कि भारत के कई छोटे शहरों में चलन है। हिंदू महिलाओं को ज्यादातर साड़ियों में देखा जाता है, लेकिन छोटी लड़कियों सलवार सूट भी पहनती हैं। परंपरा के अनुसार, एक नवविवाहित हिंदू दुल्हन उसकी साड़ी पर एक सूती शाल लपेटती है जब वह घर से बाहर कदम रखती है। हालांकि हिंदू पुरुषों के लिए पारंपरिक पोशाक धोती – सालूका है, काफी हद तक वे जींस, टी शर्ट, शर्ट और पैंट सहित पश्चिमी पोशाक अपना लिये है।

मुस्लिम महिलाएँ ज्यादातर सलवार-सूट धारण करती हैं और बुरका या नकाब पहनती हैं जब वे घर से बाहर जाती हैं। नकाब तीन प्रकार के होते हैं – तुर्की, अरबी, और हिन्दुस्तानी। तुर्की नकाब सबसे पुराना है, यह सफेद रंग की होती है और ये एक टोपी के साथ पहनी जाती है। अरबी नकाब काली होती है और सलवार-सूट को पूरी तरह से ढ़ंकती हैं, तथा इसमें आँखें एक पतली पारदर्शी जाली के माध्यम से दिखाई देती है। हिंदुस्तानी नकाब सबसे आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है, यह काले रंग में होता है और इसमें केवल आंखें दिखाई देती हैं, मुंह और माथे कवर होते हैं। मुस्लिम महिलाओं के लिए पारंपरिक पोशाक घाघरा-कमीज है, जो ज्यादातर शादियों पर पहना जाता है। मुस्लिम पुरुषों की एक विविध पोशाक होती है जिसमें शामिल है – शेरवानी, चूड़ीदार पाजामा के साथ, पठानी सूट, पैंट और शर्ट। मुस्लिम पुरुष को तुर्की, अलीगढ़ी, लखनवी और अरबी सहित विभिन्न प्रकार की टोपियाँ भी पहनते हैं।

आदिवासी महिलाएँ एक आसान तरीके से बंधी साड़ियाँ पहनती हैं, ताकि उन्हें चलने-फिरने की सहूलियत हो क्योंकि वे दैनिक कामकाज के अलावा जंगलों से आवश्यक वस्तुओं को लाने में अपने पति की मदद भी करती हैं। आदिवासी पुरुष ज्यादातर कामगार वाले कपड़े पहनते हैं जिनमें धोती, गंजी, टी-शर्ट व हाफ पैंट शामिल है। आदिवासी अत्यंत निपुण और चुस्त होते हैं और ये गुण उनकी सरल और आरामदायक पोशाक में प्रकट होता है।

बंजारा महिलाओं के कपड़ों में रंग की एक छटा दिखती है। उनकी नाजुक बंधी हुई लंहगा-चोली उनके रंगीन और घटनापूर्ण जीवन के लिए एक रूपक हैं। बंजारे पुरुष अपेक्षाकृत साधारण पोशाक धोती-कुर्ता या कभी-कभी भी टी-शर्ट पहनते हैं, लेकिन वे हमेशा चमकीले रंग के पगड़ी में देखे जाते हैं।

Comments are closed.

VIDEO

TAG CLOUD


Supported By