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निम्न तालिका से इस विशेष जड़ी बूटी के उपयोग, खुराक आदि के बारे में संक्षिप्त जानकारी मिलेगी:

वानस्पतिक नाम कैलोट्रोपिस जिजेंटिया
अंग्रेजी नाम
हिन्दी नाम अकौआ
चंदेरी में स्थानीय नाम
के लिए प्रयुक्त
  • इसकी पत्तियों को जब कुचल कर सरसों के तेल के साथ मिश्रित कर कान में डालते हैं तो यह कान दर्द के लिए एक कारगर उपाय साबित होता है।
  • पित्त असंतुलन भी इस पौधे के उपयोग से ठीक हो जाते हैं।
  • इसके फूल से निकला तत्व खाँसी और बुखार के इलाज के लिए उपयोगी है।
  • यह पौधा रक्तताल्पता व भूख की कमी के उपचार में प्रभावी है।
खुराक
मौसम
विष विज्ञान

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