उर्स, महान सूफी संत निजामुद्दीन औलिया के खलीफा हजरत वजीहुद्दीन यूसुफ की महिमा की स्मृति दिलाता है। अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में, हज़रत वजीहुद्दीन को हजरत निजामुद्दीन द्वारा आदेश दिया गया था कि वो जाएँ और चंदेरी में बसें और वहाँ लोगों के लिए काम करें। वह सन् 1305 ई. में चंदेरी पहुँचे, अपना खानकाह स्थापित किया और जल्द ही हजारों उनके भक्त बन गये।
ये भक्त न केवल चंदेरी और आसपास के क्षेत्रों से वरन् सुदूर बंगाल जैसे स्थानों से भी आये थे। उर्स का त्योहार एक तीन दिन का पर्व है जो मार्च के 27 तारीख को शुरू होता है और 29 तारीख को समाप्त हो जाता है। सब जगहों से भक्त हजरत वजीहुद्दीन के दरगाह पर आते हैं और इस महान आत्मा को श्रद्धांजलि देते हैं। इसके बाद तीन दिन तक उत्सव और कव्वाली कार्यक्रम चलता है। चंदेरी में सबसे बड़ा उत्सव उर्स के दौरान मनाया जाता है जिसमें हिंदु और मुसलमान दोनों भाग लेते है।



